Sunday, 28 May 2017

मैट्रो सिटीज को रिंग रोड की कवायद ।

अक्सर जब भी विकास की योजनाएं बनती हैं तो उनमें दूरदर्शिता कम और वर्तमान समस्याओं से निजात पाने की कवायद ज्यादा नजर आती हैं। फलस्वरूप योजनायें धरातल में नजर आए इससे पहले एक और समस्या ख़डी नजर आती है।

माननीय मुख्यमंत्री जी के राज्य के मैट्रो सिटीज में रिंग रोड लाने का सपना बुरा नहीं है मगर इस परियोजना को मैट्रो रेल परियोजना के साथ जोड़कर देखने में भी क्या बुराई है? न सिर्फ तय समय मे रिंग रोड मिलेगी बल्कि मैट्रो रेल को धरातल में उतारने का सपना भी कुछ हदतक पूरा हो सकेगा।  मकान की ऊपरी मंजिल बनाने को लेकर  सरिये का कुछ हिस्सा भवन पर बाहर छोड़ दिया जाता है ठीक उसी तरह प्रदेश की विकासोन्मुख परियोजनाओं  का खाका खींचने से पूर्व  इसी तरह के उदाहरण समझने की आवश्यकता है।


पहाड़ है तो पहाड़ जैसी समस्याएं भी होंगी इस राज्य की।हम कितनी आसानी से कह देते है कि 16 वर्ष हो गए सरकारें आयी गयीं,मगर सपनो का उत्तराखण्ड बनना अब भी शेष है,बेशक उत्तराखंड राज्य का सपना पूरा न हुआ हो किंतु आजादी के सातवे दशक मके प्रवेश करने जा रहे देश का सपना पूरा हो गया है भला?आज भी देश की 21 करोड़ जनता भूखी सोती है और इस मामले में हम चीन के करीब हैं।हम कहीं भी कभी सन्तुष्ट हुए बिना नही रह सकते। क्या ये सच नही कि देश ने,प्रदेश ने कोई तरक्की की है?अव्वल तो यह राज्य बना यही बहुत था वरना आज भी कई क्षेत्र आज भी राज्य निर्माण आंदोलन की जद में है और कई थक हार चुके।हम हर बात का ठीकरा सरकार के सर फोड़ने के आदि हो चुके हैं और खुद इतने महत्वाकाक्षा पाले हुए हैं,हम राजनीति भी अव्वल दर्जे की करना चाहते है और करना भी कुछ नही चाहते!यदि सरकारी सेवा और आंदोलनकारियों के दो चार पट्टे हमारी प्राथमिकता में रहेंगे तो 16 क्या कई और वर्ष लगेंगे और भाजपा हो या कोंग्रेस कोई भी इस राज्य को नही सँवार सकता भले ही यह  देश के किसी प्रधानमंत्री का ही सपना क्यो न हो ! हमारी कमी ये है कि हम तुलना तो हिमाचल से करते है मगर खुद कभी हिमाचली न बन सके।

Sunday, 14 May 2017

शेर आखिर शेर होता है और उसका बच्चा भी

जंगल में शेर शेरनी शिकार के लिये दूर तक गये अपने बच्चों को अकेला छोडकर।
देर तक नही लौटे तो बच्चे भूख से छटपटाने लगे उसी समय एक बकरी आई उसे दया आई और उन बच्चों को दूध पिलाया फिर बच्चे मस्ती करने लगे तभी शेर शेरनी आये बकरी को देख लाल पीले होकर हमला करता उससे पहले बच्चों ने कहा इसने हमें दूध पिलाकर बड़ा उपकार किया है नही तो हम मर जाते।
अब शेर खुश हुआ और कृतज्ञता के भाव से बोला हम तुम्हारा उपकार कभी नही भूलेंगे जाओ आजादी के साथ जंगल मे घूमो फिरो मौज करो।
अब बकरी जंगल में निर्भयता के साथ रहने लगी यहाँ तक कि शेर के पीठ पर बैठकर भी कभी कभी पेडो के पत्ते खाती थी।
यह दृश्य चील ने देखा तो हैरानी से बकरी को पूछा तब उसे पता चला कि उपकार का कितना महत्व है।
चील ने यह सोचकर कि एक प्रयोग मैं भी करता हूँ चूहों के छोटे छोटे बच्चे दलदल मे फंसे थे निकलने का प्रयास करते पर कोशिश बेकार ।
चील ने उनको पकड पकड कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया बच्चे भीगे थे सर्दी से कांप रहे थे तब चील ने अपने पंखों में छुपाया, बच्चों को बेहद राहत मिली
काफी समय बाद चील उडकर जाने लगी तो हैरान हो उठी चूहों के बच्चों ने उसके पंख कुतर डाले थे।
चील ने यह घटना बकरी को सुनाई तुमने भी उपकार किया और मैंने भी फिर यह फल अलग क्यों? ?
बकरी हंसी फिर गंभीरता से कहा
उपकार भी शेर जैसो पर किया जाए चूहों पर नही।
चूहों (कायर) हमेशा उपकार को स्मरण नही रखेंगे वो तो भूलना बहादुरी समझते है और शेर(बहादुर )उपकार कभी नही भूलेंगे ।
सनद रहे की पिछले वर्ष कश्मीरियों को सेना ने बाढ़ में डूबने से बचाया था और आज वो ही एहसान फरामोश सेना पे पत्थर और ग्रेनेड फेंक रहे हे ।
बहुत ही विचारणीय है👆 🙏

आप की असमंजस



देश के दूसरे राज्यों में विस्तार की महात्वाकांक्षा रखने वाली आम आदमी पार्टी को पंजाब और गोवा में तमाम संसाधन और ताकत झोंकने के बावजूद मिली हार और फिर दिल्ली के नगर निगम (एमसीडी) चुनाव में मिली शिकस्त से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है। आप को चाहिए कि वह गुजरात विधानसभा चुनाव में उतरने का इरादा छोड़ दिल्ली पर ज्यादा ध्यान दे ।
दिल्ली में काम न कर पाने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को हर बार दोषी ठहराने का ढर्रा भी बदला जाना चाहिए. दरअसल‘अब तक मोदी सरकार वे सभी तरीके अपना रही है, जिससे आप दिल्ली की जनता से किए अपने वादे पूरे न कर पाएं. लेकिन यह बात साहसिक और आक्रामक तरीके से सामने रखे जानेके बावजूद पार्टी का यह तरीका आम लोगों को पसंद नहीं आया. दतसल शासन और प्रशासन के मामले में जनता सिर्फ नतीजे चाहती है,बवंडर नहीं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार हमले करने का दांव भी उलटा पड़ता रहा है. ‘सहारा-बिड़ला मामले में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को जनता किे सामने रखने के लिए अरविंद ने देश के कई हिस्सों में रैलियां भी की परन्तु. लोग उल्टे सवाल पूछने लगे- कि आप हमेशा मोदी जी पर ही हमला क्यों करती है ? जिसका आप के पास कोई माकूल जबाब नही। उसे यह समझने की भी आवश्यकता है कि किसी भी तरह का विपक्षी गठजोड़ वह भी मोदी के खिलाफ,मोदी के पक्ष में ही हवा बनाएगा।
वह अब इतना भर ही कर सकती है कि केंद्र के खिलाफ विपक्षी दलों के साथ मिलकर मुद्दों पर आधारित अभियान चलाये। जैसे- ईवीएम से छेड़छाड़ का मामला. इससे निश्चित ही आम जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा. पार्टी को अपनी छवि सुधारने का मौका और वक्त भी मिलेगा.
इति शुभकामनाएं।

जब चीन हार गया भारत से !:पहाड़ वाणी

देश के लोग ये तो जानते है कि चीन ने हमें 1962 में हराया पर ये नहीं जानते कि 1967 में हमने भी चीन को हराया था। चीन ने "सिक्किम" ...