Monday, 7 August 2017

जब चीन हार गया भारत से !:पहाड़ वाणी


देश के लोग ये तो जानते है कि चीन ने हमें 1962 में हराया पर ये नहीं जानते कि 1967 में हमने भी चीन को हराया था।
चीन ने "सिक्किम" पर कब्ज़ा करने की कोशिश की थी. नाथू ला और चो ला फ्रंट पर ये युद्ध लड़ा गया था. चीन को एसा करारा जवाब मिला था कि चीनी भाग खड़े हुये थे.  इस युद्ध में, 88 भारतीय सैनिक बलिदान हुये थे और 400 चीनी सैनिक मारे गए थे. इस युद्ध के बाद ही सिक्किम, "भारत का हिस्सा" बना था !
इस युद्ध में "पूर्वी कमान" को वही सैम मानेक शॉ संभाल रहे थे जिन्होंने बांग्लादेश बनवाया था।
इस युद्ध के हीरो थे राजपुताना रेजिमेंट के मेजर जोशी, कर्नल राय सिंह , मेजर हरभजन सिंह.
गोरखा रेजिमेंट के कृष्ण बहादुर , देवीप्रसाद ने कमाल कर दिया था !! जब गोलिया ख़तम हो गयी थी तो इन गोरखों ने कई चीनियों को अपनी "खुखरी" से ही काट डाला था ! कई गोलियाँ शरीर में लिए हुए मेजर जोशी ने चार चीनी ऑफिसर को मारा ! वैसे तो कई और हीरो भी है पर ये कुछ वो नाम है जिन्हें वीर चक्र मिला और इनकी वीरगाथा इतिहास बनी !!

डोक लाम पर भारत की दो टूक पर चीन की उत्तराखण्ड और जम्मू कश्मीर में घुस आने की धमकी सिवाय झुंझलाहट के कुछ नहीं,भारत के समर्थन में आये विभिन्न राष्ट्रों की एकजुट बयानबाजी से चीन वैश्विक स्तर पर घिरा हुआ है,फिर भी भारत सरकार को सचेत रहने  की जररूत तो है ही।

Saturday, 5 August 2017

पहाड़ की आशा को है न्याय की आस !



उत्तराखंड अल्मोड़ा के स्याल्दे विकासखण्ड ग्राम  गोलना पो0 देघाट गाँव में बीते 25जुलाई 2017 की रात को एक नवविवाहिता श्रीमती आशा देवी की उसी के पति दीपक रिखाड़ी व उसके परिवार के अन्य लोगों द्वारा दहेज के कारण निर्मम हत्या कर दी गयी, आपको यह जानकार हैरानी होगी कि आशा देवी गर्भवती होने के साथ-साथ उसकी एक नौ-दस माह की लड़की भी थी, हत्या करने के बाद भी आशा के गुनेहगार अभी तक आजाद पंछी की तरह घुम रहे हैं, आशा के मायके वालों को जब यह खबर 26 जुलाई को मालुम चली तो उन्होने इस घटना की एफआईआर राजस्व थाने में दर्ज करा दी, अगर समय रहते किन्ही कारणवश आशा के परिजनों द्वारा FIR नही की गयी होती तो आशा के ससुराल वाले इस हत्या को आत्महत्या का नाम देने की पुरी तैयारी में लगे हुये थे जिनकी थोड़ी सी जागरुकता के चलते व आशा के परिजनों के दबाव में दिनांक 27 जुलाई को आशा की लाश को रानीखेत पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया गया, जिस प्रकार के चोट के निशान आशा के सिर, गले व पेट पर दिखाई दे रहे हैं उससे पुरा यकीन हो जाता है कि यह पुरी घटना को सोची समझी रणनीति के तहत एक से अधिक लोगों ने अंजाम दिया है, घटना के दिन ही आशा की नौ माह की लड़की जिसे आरोपियों ने आशा की हत्या करने के बाद बाहर कमरे की छत में फैंक दिया जो कि रोती चिल्लाती रही लेकिन फिर भी दरिन्दे पति का दिल नही पसीजा !
आज आशा की हत्या को हुये एक सप्ताह से भी ज्यादा का समय हो गया लेकिन कानुन, शासन-प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है, आरोपी अभी तक गिरफ्तार नही हुये हैं l

सौजन्य:etc masala.com


जब चीन हार गया भारत से !:पहाड़ वाणी

देश के लोग ये तो जानते है कि चीन ने हमें 1962 में हराया पर ये नहीं जानते कि 1967 में हमने भी चीन को हराया था। चीन ने "सिक्किम" ...