देश के दूसरे राज्यों में विस्तार की महात्वाकांक्षा रखने वाली आम आदमी पार्टी को पंजाब और गोवा में तमाम संसाधन और ताकत झोंकने के बावजूद मिली हार और फिर दिल्ली के नगर निगम (एमसीडी) चुनाव में मिली शिकस्त से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है। आप को चाहिए कि वह गुजरात विधानसभा चुनाव में उतरने का इरादा छोड़ दिल्ली पर ज्यादा ध्यान दे ।
दिल्ली में काम न कर पाने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को हर बार दोषी ठहराने का ढर्रा भी बदला जाना चाहिए. दरअसल‘अब तक मोदी सरकार वे सभी तरीके अपना रही है, जिससे आप दिल्ली की जनता से किए अपने वादे पूरे न कर पाएं. लेकिन यह बात साहसिक और आक्रामक तरीके से सामने रखे जानेके बावजूद पार्टी का यह तरीका आम लोगों को पसंद नहीं आया. दतसल शासन और प्रशासन के मामले में जनता सिर्फ नतीजे चाहती है,बवंडर नहीं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार हमले करने का दांव भी उलटा पड़ता रहा है. ‘सहारा-बिड़ला मामले में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को जनता किे सामने रखने के लिए अरविंद ने देश के कई हिस्सों में रैलियां भी की परन्तु. लोग उल्टे सवाल पूछने लगे- कि आप हमेशा मोदी जी पर ही हमला क्यों करती है ? जिसका आप के पास कोई माकूल जबाब नही। उसे यह समझने की भी आवश्यकता है कि किसी भी तरह का विपक्षी गठजोड़ वह भी मोदी के खिलाफ,मोदी के पक्ष में ही हवा बनाएगा।
वह अब इतना भर ही कर सकती है कि केंद्र के खिलाफ विपक्षी दलों के साथ मिलकर मुद्दों पर आधारित अभियान चलाये। जैसे- ईवीएम से छेड़छाड़ का मामला. इससे निश्चित ही आम जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा. पार्टी को अपनी छवि सुधारने का मौका और वक्त भी मिलेगा.
इति शुभकामनाएं।
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